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बिग ब्रेकिंग – जनपद पंचायत पत्थलगांव में भ्रष्टाचार चरम पर, तत्कालीन CEO और बाबुओ ने मिलकर जनपद की राशि का जमकर किया बंदरबांट..वाहन व्यय व खरीदी के नाम पर चल रहा बड़ा खेल.. लाखों की खरीदी पर भी रखते हैं कोटेशन और टेंडर प्रक्रिया को ताक पर… अधिकारी व बाबू के पास होगी आय से अधिक संपत्ति…..

 

जशपुर जिले के पत्थलगांव जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला: सीईओ और बाबू पर फर्जी बिलों से लाखों की हेराफेरी के आरोप…..

रिपोर्ट – शिवप्रताप सिंह राजपूत

जशपुर, 20 दिसंबर 2025 (वेब डेस्क): छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में स्थित पत्थलगांव जनपद पंचायत, जो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, इन दिनों भ्रष्टाचार की सुर्खियों में है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यहां पदस्थ रहे कई मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) और बाबू मिलकर जनपद निधि का खुलेआम दुरुपयोग कर रहे हैं। इनपर फर्जी वाहन किराया, डीजल व्यय और खरीदी के नाम पर लाखों रुपये की हेराफेरी के आरोप लगे हैं, जो शासन की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

फर्जी बिलों से वाहन व्यय का खेल

सूत्रों का दावा है कि पिछले 5-6 वर्षों में पत्थलगांव जनपद में पदस्थ सभी सीईओ ने अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से डीजल और वाहन किराया निकाला है। यहां तक कि निजी वाहनों के टायरों के बिल भी जनपद निधि से आहरित किए गए हैं। प्रतिमाह किसी सीईओ ने 30 हजार, किसी ने 50 हजार, तो किसी ने 70 हजार से लेकर लाखों रुपये तक की राशि वाहन व्यय के नाम पर निकाली है। हैरानी की बात यह है कि न तो सही बिल मौजूद हैं, न ही दौरे की लॉगबुक, और बिल ऐसे व्यक्तियों के नाम से हैं जिनकी कोई ट्रैवल एजेंसी या वाहन ही नहीं है।

विशेष रूप से नाम लिए गए अधिकारियों में पूर्व सीईओ टी.डी. मरकाम (वर्तमान में मैनपुर, गरियाबंद में एसडीएम), पवन पटेल, वी.के. राठौर और वर्तमान में जनपद पंचायत सीईओ डिप्टी कलेक्टर प्रियंका गुप्ता शामिल हैं। इनके अलावा, वर्षों से जनपद में जमे बाबू समारु नवरतन  पर भी आरोप हैं कि उन्होंने इन अधिकारियों के साथ मिलकर यह खेल खेला है। सूत्र बताते हैं कि यदि इनके कार्यकाल की जांच की जाए, तो शासन के धन का कितना दुरुपयोग हुआ, इसका खुलासा हो सकता है।

भंडार क्रय नियमों की अनदेखी: लाखों की खरीदी बिना टेंडर

शासन द्वारा जारी भंडार क्रय नियमों के तहत खरीदी को तीन भागों में बांटा गया है, जिसमें कोटेशन पद्धति और टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य है। लेकिन पत्थलगांव जनपद में लाखों की खरीदी के बावजूद इन नियमों का पालन नहीं किया गया। स्टेशनरी और अन्य सामग्री के लिए साल भर में 5 लाख से अधिक की खरीदी हुई, लेकिन न कोटेशन लिए गए, न टेंडर निकाले गए। सूत्रों का कहना है कि यह सब अपने चहेतों को फायदा पहुंचाने और कमीशन लेने के चक्कर में किया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।

जनपद निधि, 15वें वित्त आयोग मद, गौंड खनिज मद समेत अन्य मदों से यदि आय-व्यय की जांच हो, तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। अधिकारियों और बाबुओं की संपत्ति जांच से भी आय से अधिक संपत्ति का पता चल सकता है।

क्षेत्र में भ्रष्टाचार की अन्य घटनाएं: सड़क निर्माण से लेकर भोलेभाले ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार तक

पत्थलगांव क्षेत्र में भ्रष्टाचार की यह पहली घटना नहीं है। हाल ही में, दो दिन पुरानी सड़क उखड़ने का मामला सामने आया, जहां प्रशासन को जेसीबी से खुद उखड़वाना पड़ा। भाजपा ने इस पर हल्ला बोलते हुए इसे भ्रष्टाचार की मिसाल बताया। राजस्व निरीक्षक ताराचंद राठौर पर ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। भ्रष्टाचार के और भी कई मामले हैं जिन्हें हम आने वाले समय आपके सामने लेकर आएंगे।

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर सवाल

पत्थलगांव मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा का हिस्सा होने के बावजूद यहां भ्रष्टाचार चरम पर है। सूत्रों का कहना है कि यदि विधानसभा सत्र में यह मुद्दा उठा, तो बड़ा हंगामा हो सकता है।

अब सवाल यह है कि शासन इन भ्रष्ट अधिकारियों और बाबुओं पर क्या कार्रवाई करेगा? क्या वाहन व्यय की राशि की रिकवरी होगी? और वर्षों से जमे बाबू समारु नवरतन का तबादला आखिर कब होगा?

शासन प्रशासन से अपील है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित हो।

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