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बिग ब्रेकिंग : जशपुर के पास भालू के हमले में ग्रामीण युवक गंभीर रूप से घायल, घायल अवस्था मे युवक को सिविल अस्पताल में कराया गया भर्ती…..

पत्थलगांव (जशपुर) 26 सितंबर 2025 :छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के कापू थाना क्षेत्र अंतर्गत पारेमेर गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। जंगली भालू के हमले का शिकार बने स्थानीय युवक कुंवर साय को गंभीर चोटें आई हैं। घटना गुरुवार शाम की बताई जा रही है, जब युवक फसल की रखवाली के लिए खेत में आग जलाकर बैठा था। तभी जंगली भालू ने अचानक उसपर हमला कर दिया और युवक को मृत समझकर छोड़ दिया। फिलहाल, घायल युवक को पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।
कैसे हुआ यह हादसा?
पारेमेर गांव निवासी कुंवर साय (उम्र 30 वर्ष) एक साधारण ग्रामीण युवक है, जिसका पूरा परिवार खेती-बाड़ी पर निर्भर है। जंगलों से सटे इस गांव में जंगली जानवरों का आतंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार का हमला बेहद भयावह रहा। घायल युवक के अनुसार वह जंगली जानवरों से अपनी फसल की सुरक्षा के लिए शाम को खेत गया था। जहां उसने खेत में आग जलाकर फसल की रखवाली शुरू की, जो ग्रामीण इलाकों में आम प्रथा है ताकि भटकते हुए जानवर फसल नष्ट न करें। तभी अचानक एक बड़ा भालू आया और उसने कुंवर साय पर झपट्टा मार दिया। भालू ने युवक के पैरों और हाथों पर बुरी तरह नाखूनों से वार किया, जिससे गहरी चोटें लगीं। हमले के दौरान कुंवर साय ने जोर-जोर से चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन भालू ने उसे जमीन पर दबोच लिया। काफी देर तक चले इस संघर्ष के बाद भालू ने उसे मृत समझ लिया और जंगल की ओर भाग गया। भालू के चले जाने के बाद घायल युवक किसी तरह उठकर अपने घर पहुंचा जहां उसकी हालत देखकर परिजनों ने तुरंत 108 एंबुलेंस की मदद से युवक को पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उसका उपचार किया। चिकित्सकों के अनुसार, पैरों और हाथों की चोटें गहरी हैं, जिसमें कई टांके लगाए गए हैं। साथ ही, रेबीज का खतरा होने के कारण एंटी-रेबीज इंजेक्शन का कोर्स शुरू किया गया है। बीएमओ डॉ. “जेम्स मिंज ने बताया, “युवक की हालत स्थिर है, लेकिन उसे निगरानी में रखा गया है। अगर कोई जटिलता नहीं आई तो कुछ दिनों में उसे छुट्टी मिल सकती है।”
जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक: क्यों हो रहे हैं ऐसे हमले?
रायगढ़ जिले के कापू क्षेत्र में जंगल और खेतों की सीमा बेहद नजदीक है। मानसून के बाद फसल पकने का समय होने से जंगली सुवर, भालू और अन्य जंगली जानवर भोजन की तलाश में गांवों की ओर भटकने लगते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई के कारण ये जानवर मानव बस्तियों में घुसपैठ कर रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों जैसे कोरबा और कांकेर में भी भालू हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जहां कई लोग घायल हुए। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि पारेमेर गांव में पिछले एक महीने में ही तीन बार भालू की आवाजाही देखी गई थी। वन विभाग से बार-बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई ठोस कदम अब तक विभाग के द्वारा नहीं उठाया गया है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ? बचाव के उपाय
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, भालू हमले से बचने के लिए ग्रामीणों को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
– रात के समय अकेले जंगल या खेत न जाएं।
– भालू दिखने पर शोर मचाएं या पीछे न हटें, बल्कि धीरे-धीरे दूर हो जाएं।
– फसल सुरक्षा के लिए समूह में काम करें और वन विभाग को सूचित करें।
– बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सतर्क रहने की हिदायत दें।
यह घटना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीर समस्या को उजागर करती है। वन विभाग और स्थानीय प्रशासन से अपेक्षा है कि वे तत्काल कदम उठाएं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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