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जशपुर जिले के बगीचा में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ की भव्य तैयारियां शुरू, शक्ति कलश का हुआ भव्य स्वागत…..

 

जशपुर, 30 अगस्त 2025/ छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा में 10 से 13 दिसंबर 2025 तक आयोजित होने वाले 108 कुंडीय शक्ति संवर्धन गायत्री महायज्ञ की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। इस पावन आयोजन की शुरुआत शांतिकुंज हरिद्वार से आए 33 गायत्री परिजनों द्वारा शक्ति कलश के भव्य स्वागत के साथ हुई। स्थानीय बस स्टैंड पर मातृशक्ति और नगरवासियों ने गायत्री मंत्रोच्चार और मंगल गान के साथ शक्ति कलश का पूजन-अर्चन कर भव्य स्वागत किया।

शक्ति कलश का नगर भ्रमण और स्थापना

शक्ति कलश के स्वागत के बाद मातृशक्ति ने सिर पर कलश धारण कर गायत्री मंत्रोच्चार के साथ नगर के मुख्य मार्गों से भव्य शोभायात्रा निकाली। यह यात्रा विघ्न विनाशक गणपति बप्पा के दर्शन के साथ शुरू हुई और स्थानीय दुर्गा मंदिर पहुंची। वहां पूजन-अर्चन के बाद शक्ति कलश को प्रज्ञापीठ बगीचा में विधिवत स्थापित किया गया। इस अवसर पर गायत्री परिवार के परिजनों के साथ-साथ प्रज्ञा महिला मंडल की बहनें और स्थानीय नागरिक, जिनमें मुकेश शर्मा, गीता सिन्हा, मुक्ता यादव, द्रौपदी यादव, संतोष गुप्ता, उमाशंकर, भूपेंद्र थवाईत, भगवानो यादव, संतोष सोनी, रमेश गुप्ता, देवराज नागेश सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

तीन महीने की विस्तृत कार्ययोजना

यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि इस महायज्ञ की तैयारियों के लिए अगले तीन महीनों की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। इसकी शुरुआत 1 सितंबर 2025 को प्रातः 8 बजे से गायत्री मंदिर में 24 घंटे के अखंड जप के साथ होगी, जिसकी पूर्णाहुति 2 सितंबर को प्रातः 8 बजे होगी। इस अखंड जप के बाद परिजनों और नगरवासियों की एक आवश्यक गोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें यज्ञ की तैयारियों और आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श होगा।

कार्ययोजना के तहत गायत्री परिवार द्वारा घर-घर दीप महायज्ञ, एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ, मंत्र लेखन, मुट्ठी चावल अन्नदान, अंशदान, श्रमदान, और समयदान जैसे कार्यक्रमों की श्रृंखला सतत रूप से चलाई जाएगी। यह सभी प्रयास यज्ञ के व्यापक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में सुसंस्कारों के बीज बोने के लिए होंगे।

शांतिकुंज हरिद्वार से स्वीकृति प्राप्त

108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ की स्वीकृति अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार से प्राप्त हो चुकी है। इस स्वीकृति के बाद स्थानीय स्तर पर आयोजन की भव्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। शक्ति कलश के भ्रमण के माध्यम से गायत्री परिजन गांव-गांव तक युग निर्माण योजना का संदेश पहुंचाएंगे और लोगों को इस महायज्ञ में शामिल होने के लिए आमंत्रित करेंगे।

महायज्ञ का उद्देश्य और महत्व

108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक जागरण, सुख-शांति, समृद्धि और युवाओं में चरित्र निर्माण के साथ देशभक्ति की भावना को जागृत करना है। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। गायत्री परिवार के परिजन रमेश गुप्ता ने बताया कि यह महायज्ञ बगीचा और आसपास के क्षेत्र में सुसंस्कारों और देवत्व की स्थापना के लिए एक विराट आध्यात्मिक प्रयोग होगा।

नागरिकों में उत्साह, तैयारियां जोरों पर

शक्ति कलश के स्वागत और अखंड जप की घोषणा के साथ ही बगीचा के नागरिकों में उत्साह का माहौल है। गायत्री परिवार और स्थानीय निवासियों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया है। आगामी दिनों में होने वाले विभिन्न धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से इस महायज्ञ को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

गायत्री परिवार ने सभी नगरवासियों और आसपास के क्षेत्र के लोगों से इस पावन आयोजन में शामिल होने और इसे सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की है।

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